स्वास्थ्य विभाग के रहमों करम से जिले में चल रहा अवैध मानक विहीन अस्पताल,#jaunpurnews

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जौनपुर में ‘सेहत का सौदागर अवैध अस्पतालों का जाल, मरीज से लूट और मासूम मरीज की जान खतरे में

*अवैध हॉस्पिटलो पर जांच के नाम पर सिर्फ हुई खानापूर्ति*

*अवैध पॉली क्लीनिक संचालक लुट-घसोट करने में मस्त, अधिकारी मौन*

जौनपुर जिले मानकों को ताख पर रखकर अवैद्य अस्पतालों का संचालन धड़ल्ले से चलाया जा रहा है इस क्रम में विभागीय की छापेमारी पर भी अब सवाल उठने लगा है क्योंकि पिछले हफ्ते नगर क्षेत्र के दिशा अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के छापेमारी के दौरान मानक विहीन और बगैर लाइसेंस के कारण सीज किया गया हैरत की बात तो ये है कि इस अस्पताल के संचालक ने किसके रहमो करम पर सीज अस्पताल का ताला कटर से तोड़ कर अस्पताल चालू कर लिया था वही इस मामले की जैसे ही जानकारी चौकी इंचार्ज कंचन पांडेय को हुई तो उन्होंने त्वरित कार्यवाही करते हुए अस्पताल संचालक को हिरासत में लेकर कोतवाली में बैठा दिया,इस दौरान दीपावली का अवकाश होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के लोगों ने मानो चुप्पी साध ली थी जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी को सिटी मजिस्ट्रेट के कोर्ट में भेज जहां से उसे जमानत दे दी गई।

जनता अब बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही पर उठाने लगी है सवाल

पिछले हफ्ते में डीएम कार्यालय के सामने एक यूटयूबर ने जब स्वास्थ्य विभाग और नगर एक हॉस्पिटल मां प्रेमा हॉस्पिटल पर आरोप लगाते हुए आत्मदाह का प्रयास करने के बाद जिला प्रशासन ने ताबडतोड़ केराकत,मछलीशहर में अवैद्य अस्पतालों पर जांच और छापेमारी की कार्यवाही शुरू तो।हुई लेकिन इस दौरान एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर आरोप लगने लगे है जांच के नाम अवैद्य अस्पतालों को सीज तो किया जाता है लेकिन सूत्र बताते है इन अवैद्य अस्पतालों को पीछे के दरवाजे से इसे खोल दिया जाता है शुरू होता है भ्रष्टाचार का लम्बा खेल ।

जौनपुर के नगर से लेकर तहसीलों तक फैला है अवैद्य अस्पतालों का जखीरा

जौनपुर जिले के जिला अस्पताल के इर्द गिर्द दर्जनों अस्पताल जो मानकों को ताख पर रखकर जनता के जान से खिलवाड़ करते हुए लुट मची है इस लूट में स्वास्थ्य विभाग के आशा कार्यकत्रियों की अहम भूमिका है जो इन अवैद्य अस्पतालों को कमीशन लेकर अस्पतालों से कमीशन लेकर मासूम जनता के जान की कीमत लगा देते है इस क्रम में नगर जेसीज चौराहा से लेकर कालीचाबाद,नईगंज,सहित तमाम इलाकों में चलाए जा रहे है,यही नही जिले के करीब 80 प्रतिशत ऐसे अस्पताल है जो बेसमेंट में चलाए जा रहे है और बगैर फायर एनओसी और बगैर वैद्य डाक्टरों के चलाए जा रहे है।

स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गरीबों की जिंदगी और गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ हो रहा है। अवैध निजी अस्पताल और क्लीनिक एक ‘उद्योग’ का रूप ले चुके हैं, जहां मरीजों को आर्थिक रूप से कंगाल बनाया जा रहा है। और उनकी जान भी जोखिम में डाली जा रही है।’नकली डॉक्टर’ कर रहे हैं इलाज। बता दे कि सामुदायिक स्वास्थ्य से महज 20 मीटर दूरी तमाम अवैध हॉस्पिटाल बिना मान्यता और मानक विहीन धड़ल्ले से चल रहा है जिसपर अधीक्षक चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। 

केराकत स्टेशन रोड़, सरकी रोड़, टीवीएस एजेंसी के नीचे, मनियरा चौराहा, सिहौली चौराहा सहित अन्य जैसे क्षेत्रों में कई अस्पताल या तो पूरी तरह अवैध हैं, या उनके रजिस्ट्रेशन की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि रजिस्ट्रेशन के लिए भले ही बड़े और वैध डॉक्टरों की डिग्रियां लगाई जाती हों, लेकिन हकीकत में इलाज ‘झोलाछाप’ (बिना वैध डिग्री वाले) डॉक्टर कर रहे हैं। ये ‘नकली डॉक्टर’ मरीजों पर अनावश्यक, महंगे ऑपरेशन और दवाइयां थोपकर उन्हें लूट रहे हैं दवा और ऑक्सीजन की कालाबाजारी मानवता को शर्मसार करते हुए।

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