89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव समेत तमाम गणमान्य लोगों ने दी श्रद्धांजलि
जौनपुर। जिले के सिविल कोर्ट में फौजदारी के वरिष्ठतम अधिवक्ताओं में शुमार पंडित मिन्नालाल तिवारी का गुरुवार को ओलंदगंज स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह लगभग 89 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से अधिवक्ता समाज सहित जिले के राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
पंडित मिन्नालाल तिवारी मूल रूप से मछलीशहर तहसील क्षेत्र के महापुर गांव के निवासी थे। वह स्वर्गीय पंडित हरिहर प्रसाद तिवारी के पुत्र थे। उन्होंने वर्ष 1965 में जौनपुर के दीवानी न्यायालय में अपनी वकालत की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय बलदेव जी मेहरोत्रा के यहां स्वर्गीय सूर्यबली यादव एडवोकेट के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने अपने कानूनी ज्ञान, अनुभव और कार्यशैली से फौजदारी के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई।
61 वर्षों तक न्यायालय में दी सेवाएं
पंडित मिन्नालाल तिवारी ने अपने जीवन के अमूल्य 61 वर्ष दीवानी न्यायालय जौनपुर को समर्पित किए। उनके निधन से अधिवक्ता समाज ने एक अनुभवी और वरिष्ठ विधिवेत्ता को खो दिया है। उनके पुत्र राहुल तिवारी भी अधिवक्ता हैं, जबकि उनके ज्येष्ठ पुत्र विजय प्रताप तिवारी राज डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर हैं। वह अपने पीछे दो पुत्रों और तीन पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने दी श्रद्धांजलि
वरिष्ठ अधिवक्ता के निधन का समाचार मिलने पर जौनपुर सदर के विधायक एवं प्रदेश सरकार में खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव उनके आवास पर पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।
इसके अलावा महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, दीवानी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अवधेश सिंह, मंत्री मनीष सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता तेज बहादुर सिंह, प्रेम शंकर मिश्र, दुष्यंत सिंह, गौरी शंकर मिश्रा, पत्रकार रामदयाल दुबे, सत्येंद्र बहादुर सिंह, रमेश चंद उपाध्याय तथा जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी लाल बहादुर पाल समेत अनेक गणमान्य लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की।
रामघाट पर हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार से पूर्व पंडित मिन्नालाल तिवारी के पार्थिव शरीर को दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ परिसर में लाया गया। यहां बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
इसके बाद आदि गंगा गोमती के पावन तट रामघाट पर पूरे नागरिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान अधिवक्ताओं, समाजसेवियों, व्यापारियों, राजनेताओं और पत्रकारों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।




