अघोर पीठ पड़ाव में मनाई गई अघोरेश्वर भगवान राम की 90वीं जयंती,इंद्रियों की पराधीनता छोड़कर विवेक के मार्ग पर चलें : बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम

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वाराणसी। अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव में शुक्रवार को परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की 90वीं जयंती भक्तिमय वातावरण में मनाई गई। दो दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ 17 सितंबर को परमपूज्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी की 426वीं जन्म षष्ठी (लोलार्क षष्ठी) पर्व के साथ हुआ।


जयंती समारोह में देशभर से पहुंचे श्री सर्वेश्वरी समूह के सैकड़ों सदस्य एवं श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। प्रातःकाल सफाई-श्रमदान के बाद प्रभातफेरी निकाली गई, जो पड़ाव आश्रम से अघोरेश्वर महाविभूति स्थल एवं अघोरेश्वर भगवान राम घाट तक पहुंची। गंगातट पर समाधि के दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु गंगाजलयुक्त कलश लेकर आश्रम लौटे।


इसके बाद पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने गणेश पीठ स्थित परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के चिरकालिक आसन का विधिवत पूजन किया। सफलयोनि पाठ के बाद उपासना स्थल चिरकुट देवी विहार में हवन-पूजन हुआ तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। अखंड संकीर्तन “अघोरान्ना परो मन्त्रः नास्ति तत्वं गुरोः परम्” का समापन आरती-पूजन के साथ हुआ।


सायंकाल आयोजित विचार-गोष्ठी में पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने कहा कि समाज में बढ़ती कटुता, विभाजन, स्वार्थ और अशांति का मूल कारण मनुष्य की अपनी कमजोरियां, इंद्रियों की पराधीनता और विवेक का क्षीण होना है। उन्होंने कहा कि सूर्य, चंद्रमा, वायु और पंचतत्व किसी जाति, धर्म, भाषा या देश के आधार पर भेदभाव नहीं करते। सभी मनुष्यों का शरीर उन्हीं पंचतत्वों से बना है और सभी के भीतर एक ही परम तत्व विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, मजहब, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजन एवं घृणा मानवता की मूल भावना के विपरीत है। समाज और राष्ट्र में बढ़ते संघर्ष, लोभ, अहंकार और भ्रष्ट आचरण से बचने के लिए व्यक्ति को पहले स्वयं के भीतर सुधार लाना होगा। ‘पराधीन सपनेहूँ सुख नाहीं’ का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपनी इंद्रियों का दास बन जाता है तो लोभ, क्रोध और अहंकार उसके जीवन में दुख और अशांति पैदा करते हैं।


बाबा जी ने महापुरुषों की शिक्षाओं को केवल सुनने के बजाय उनका अध्ययन, चिंतन और जीवन में पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने श्री सर्वेश्वरी समूह से जुड़े लोगों से स्वार्थपूर्ण विवादों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर राष्ट्र, समाज, संस्कृति और मानवता के हित में कार्य करने का आग्रह किया।
गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व अपर निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.पी. सिंह ने की। वक्ताओं में डॉ. प्रदीप सिंह, श्रीकांत मिश्र, श्री धनंजय राव, श्री मनोज सिंह एवं श्री शशि गुप्ता शामिल रहे। मंगलाचरण कु. राशि ने किया, जबकि श्रीमती प्रीतिमा सिंह ने भजन प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. वामदेव पाण्डेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री सर्वेश्वरी समूह के उपाध्यक्ष श्री सुरेश सिंह ने किया।
कार्यक्रम के दौरान पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु द्वारा रचित पुस्तक ‘अघोरेश्वर कथा’ के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण भी किया।
250 मरीजों के बीच सेवा सामग्री वितरित
जयंती के अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, पड़ाव की ओर से श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय के विभिन्न वार्डों में भर्ती लगभग 250 रोगियों के बीच भुना चना, फल, बिस्कुट एवं फलों का जूस वितरित किया गया। इस सेवा कार्य में चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री ब्रिजेश कुमार एवं डेंटिस्ट डॉ. पुष्प सिंह का सहयोग रहा।
आश्रम की ओर से श्री सर्वेश्वरी समूह के संयुक्त मंत्री श्री अरविन्द कुमार सिंह, प्रचार मंत्री श्री पारस नाथ यादव, कोषाध्यक्ष श्री चंद्रविक्रम शाह, अघोर परिषद ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री नागेश सिंह, श्री धर्मेन्द्र गौतम सहित अन्य स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य में सहभागिता की।

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